प्रोवाच पितरं तत्र राघवो रामलक्ष्मणौ ।
सुतौ दशरथस्येमौ धनुर्दर्शनकाङ्क्षिणौ ।
इत्युक्तस्तेन विप्रेण तद्धनुः समुपानयत् ॥
प्रोवाच पितरं तत्र राघवो रामलक्ष्मणौ ।
सुतौ दशरथस्येमौ धनुर्दर्शनकाङ्क्षिणौ ।
इत्युक्तस्तेन विप्रेण तद्धनुः समुपानयत् ॥
M N Dutt
Then Viśvāmitra said to my father, 'The descendants of Raghu, sons of Daśaratha, Rāma and Lakşmaņa are anxious to behold the bow.'पदच्छेदः
| प्रोवाच | प्रोवाच (√प्र-वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| पितरं | पितृ (२.१) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| भ्रातरौ | भ्रातृ (२.२) |
| रामलक्ष्मणौ | राम–लक्ष्मण (१.२) |
| सुतौ | सुत (१.२) |
| दशरथस्येमौ | दशरथ (६.१)–इदम् (१.२) |
| धनुर्दर्शनकाङ्क्षिणौ | धनुस्–दर्शन–काङ्क्षिन् (२.२) |
| इत्य् | इति (अव्ययः) |
| उक्तस् | उक्त (√वच् + क्त, १.१) |
| तेन | तद् (३.१) |
| विप्रेण | विप्र (३.१) |
| तद् | तद् (२.१) |
| धनुः | धनुस् (२.१) |
| समुपानयत् | समुपानयत् (√समुपा-नी लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रो | वा | च | पि | त | रं | त | त्र | रा | घ | वो | रा |
| म | ल | क्ष्म | णौ | सु | तौ | द | श | र | थ | स्ये | मौ |
| ध | नु | र्द | र्श | न | का | ङ्क्षि | णौ | इ | त्यु | क्त | स्ते |
| न | वि | प्रे | ण | त | द्ध | नुः | स | मु | पा | न | यत् |