पदच्छेदः
| शारदाभ्रघनप्रख्यं | शारद–अभ्र–घन–प्रख्या (२.१) |
| दीप्तं | दीप्त (√दीप् + क्त, २.१) |
| मेरुगुहोपमम् | मेरु–गुहा–उपम (२.१) |
| दामभिर् | दामन् (३.३) |
| वरमाल्यानां | वर–माल्य (६.३) |
| सुमहद्भिर् | सु (अव्ययः)–महत् (३.३) |
| अलंकृतम् | अलंकृत (√अलम्-कृ + क्त, २.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| शा | र | दा | भ्र | घ | न | प्र | ख्यं |
| दी | प्तं | मे | रु | गु | हो | प | मम् |
| दा | म | भि | र्व | र | मा | ल्या | नां |
| सु | म | ह | द्भि | र | लं | कृ | तम् |