अन्वयः
इति thus, ब्रुवन्तम् speaking, नृपम् king Dasaratha, नृपा: kings, मुदिता: delighted, वृष्टिमन्तम् raining, महामेघम् thick cloud, नर्दन्त: making sounds, बर्हिण: इव like peacocks, प्रत्यनन्दन् acclaimed.
Summary
Having thus heard king Dasaratha speak, the kings acclaimed him with delight, like peacocks crying (in joy) to see thick clouds.
पदच्छेदः
| इति | इति (अव्ययः) |
| ब्रुवन्तं | ब्रुवत् (√ब्रू + शतृ, २.१) |
| मुदिताः | मुदित (√मुद् + क्त, १.३) |
| प्रत्यनन्दन् | प्रत्यनन्दत् (√प्रति-नन्द् लङ् प्र.पु. एक.) |
| नृपा | नृप (१.३) |
| नृपम् | नृप (२.१) |
| वृष्टिमन्तं | वृष्टिमत् (२.१) |
| महामेघं | महत्–मेघ (२.१) |
| नर्दन्तम् | नर्दत् (√नर्द् + शतृ, २.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| बर्हिणः | बर्हिन् (१.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| इ | ति | ब्रु | व | न्तं | मु | दि | ताः |
| प्र | त्य | न | न्द | न्नृ | पा | नृ | पम् |
| वृ | ष्टि | म | न्तं | म | हा | मे | घं |
| न | र्द | न्त | मि | व | ब | र्हि | णः |