पदच्छेदः
| तेनास्येहातुला | तद् (३.१)–इदम् (६.१)–इह (अव्ययः)–अतुल (१.१) |
| कीर्तिर् | कीर्ति (१.१) |
| यशस् | यशस् (१.१) |
| तेजश् | तेजस् (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| वर्धते | वर्धते (√वृध् लट् प्र.पु. एक.) |
| देवासुरमनुष्याणां | देव–असुर–मनुष्य (६.३) |
| सर्वास्त्रेषु | सर्व–अस्त्र (७.३) |
| विशारदः | विशारद (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ते | ना | स्ये | हा | तु | ला | की | र्ति |
| र्य | श | स्ते | ज | श्च | व | र्ध | ते |
| दे | वा | सु | र | म | नु | ष्या | णां |
| स | र्वा | स्त्रे | षु | वि | शा | र | दः |