अन्वयः
मनुष्याणाम् of people, व्यसनेषु in misfortunes, भृशम् profoundly, दु:खित: भवति is grieved, सर्वेषु among all, उत्सवेषु on festive occasions, पितेव like father, परितुष्यति rejoices.
Summary
He grieves profoundly whenever people are afflicted by misfortunes (and) rejoices like a father on festive occasions.
पदच्छेदः
| व्यसनेषु | व्यसन (७.३) |
| मनुष्याणां | मनुष्य (६.३) |
| भृशं | भृशम् (अव्ययः) |
| भवति | भवति (√भू लट् प्र.पु. एक.) |
| दुःखितः | दुःखित (१.१) |
| उत्सवेषु | उत्सव (७.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| सर्वेषु | सर्व (७.३) |
| पितेव | पितृ (१.१)–इव (अव्ययः) |
| परितुष्यति | परितुष्यति (√परि-तुष् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| व्य | स | ने | षु | म | नु | ष्या | णां |
| भृ | शं | भ | व | ति | दुः | खि | तः |
| उ | त्स | वे | षु | च | स | र्वे | षु |
| पि | ते | व | प | रि | तु | ष्य | ति |