अनन्यभावामनुरक्तचेतसं; त्वया वियुक्तां मरणाय निश्चिताम् ।
नयस्व मां साधु कुरुष्व याचनां; न ते मयातो गुरुता भविष्यति ॥
अनन्यभावामनुरक्तचेतसं; त्वया वियुक्तां मरणाय निश्चिताम् ।
नयस्व मां साधु कुरुष्व याचनां; न ते मयातो गुरुता भविष्यति ॥
अन्वयः
अनन्यभावाम् without any other thought, अनुरक्तचेतसम् with heart deeply attached, त्वया by you, वियुक्ताम् separated (from you), मरणाय for death, निश्चिताम् resolved, माम् me, नयस्व take, याचनाम् my prayer, साधु be welldisposed, कुरुष्व do, अतः for that, ते for you, मया by me, गुरुता burden, न भविष्यति will not be.M N Dutt
Do you accept my entreaty whose heart is entirely yours, knows none else, and is ever attached to you, and who am resolved to die if forsaken by you; thus repairing I shall be in no way a burden to you.Summary
Since I have no thought other than you and my heart is (irretrievably) attached to you I have resolved to die if separated from you. Pray, be favourably disposed to take me. I shall not be a burden to you.पदच्छेदः
| अनन्यभावाम् | अनन्य–भाव (२.१) |
| अनुरक्तचेतसं | अनुरक्त (√अनु-रञ्ज् + क्त)–चेतस् (२.१) |
| त्वया | त्वद् (३.१) |
| वियुक्तां | वियुक्त (√वि-युज् + क्त, २.१) |
| मरणाय | मरण (४.१) |
| निश्चिताम् | निश्चित (√निः-चि + क्त, २.१) |
| नयस्व | नयस्व (√नी लोट् म.पु. ) |
| मां | मद् (२.१) |
| साधु | साधु (२.१) |
| कुरुष्व | कुरुष्व (√कृ लोट् म.पु. ) |
| याचनां | याचना (२.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| मयातो | मद् (३.१)–अतस् (अव्ययः) |
| गुरुता | गुरुता (१.१) |
| भविष्यति | भविष्यति (√भू लृट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | न | न्य | भा | वा | म | नु | र | क्त | चे | त | सं |
| त्व | या | वि | यु | क्तां | म | र | णा | य | नि | श्चि | ताम् |
| न | य | स्व | मां | सा | धु | कु | रु | ष्व | या | च | नां |
| न | ते | म | या | तो | गु | रु | ता | भ | वि | ष्य | ति |
| ज | त | ज | र | ||||||||