पदच्छेदः
| गन्धर्वराजप्रतिमं | गन्धर्वराज–प्रतिमा (२.१) |
| लोके | लोक (७.१) |
| विख्यातपौरुषम् | विख्यात (√वि-ख्या + क्त)–पौरुष (२.१) |
| दीर्घबाहुं | दीर्घ–बाहु (२.१) |
| महासत्त्वं | महत्–सत्त्व (२.१) |
| मत्तमातंगगामिनम् | मत्त (√मद् + क्त)–मातंग–गामिन् (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ग | न्ध | र्व | रा | ज | प्र | ति | मं |
| लो | के | वि | ख्या | त | पौ | रु | षम् |
| दी | र्घ | बा | हुं | म | हा | स | त्त्वं |
| म | त्त | मा | त | ङ्ग | गा | मि | नम् |