पदच्छेदः
| घर्माभितप्ताः | घर्म–अभितप्त (√अभि-तप् + क्त, २.३) |
| पर्जन्यं | पर्जन्य (२.१) |
| ह्लादयन्तम् | ह्लादयत् (√ह्लादय् + शतृ, २.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| प्रजाः | प्रजा (२.३) |
| न | न (अव्ययः) |
| ततर्प | ततर्प (√तृप् लिट् प्र.पु. एक.) |
| समायान्तं | समायान्त् (√समा-या + शतृ, २.१) |
| पश्यमानो | पश्यमान (√पश् + शानच्, १.१) |
| नराधिपः | नराधिप (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| घ | र्मा | भि | त | प्ताः | प | र्ज | न्यं |
| ह्ला | द | य | न्त | मि | व | प्र | जाः |
| न | त | त | र्प | स | मा | या | न्तं |
| प | श्य | मा | नो | न | रा | धि | पः |