अन्वयः
तस्य रामस्य that Rama's, सुहृदः friends, तत् श्रुत्वा hearing that, त्वरिताः in great haste, प्रियकारिणः with the intention of causing pleasure, शीघ्रम् speedily, अभ्येत्य having approached, कौशल्यायै to Kausalya, न्यवेदयन् informed.
Summary
Having heard this, Rama's friends quickly reported the matter to Kausalya so that she might be happy.
पदच्छेदः
| तच् | तद् (२.१) |
| छ्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| सुहृदस् | सुहृद् (१.३) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| रामस्य | राम (६.१) |
| प्रियकारिणः | प्रिय–कारिन् (१.३) |
| त्वरिताः | त्वरित (१.३) |
| शीघ्रम् | शीघ्रम् (अव्ययः) |
| अभ्येत्य | अभ्येत्य (√अभ्या-इ + ल्यप्) |
| कौसल्यायै | कौसल्या (४.१) |
| न्यवेदयन् | न्यवेदयन् (√नि-वेदय् लङ् प्र.पु. बहु.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | च्छ्रु | त्वा | सु | हृ | द | स्त | स्य |
| रा | म | स्य | प्रि | य | का | रि | णः |
| त्व | रि | ताः | शी | घ्र | म | भ्ये | त्य |
| कौ | स | ल्या | यै | न्य | वे | द | यन् |