अन्वयः
राघवे Rama, चिररात्राय for a long period, महारण्यम् to the great forest, प्रतियाते having set out, नगरे in the city, मूर्छा बभूव was deprived of senses, जनस्य for men, बलमूर्छा च were deprived of their strength.
Summary
Having seen Rama set out for the great forest for a long period, the city was stilled and men were enervated.
पदच्छेदः
| प्रयाते | प्रयात (√प्र-या + क्त, ७.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| महारण्यं | महत्–अरण्य (२.१) |
| चिररात्राय | चिर–रात्र (४.१) |
| राघवे | राघव (७.१) |
| बभूव | बभूव (√भू लिट् प्र.पु. एक.) |
| नगरे | नगर (७.१) |
| मूर्छा | मूर्छा (१.१) |
| बलमूर्छा | बल–मूर्छा (१.१) |
| जनस्य | जन (६.१) |
| च | च (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| प्र | या | ते | तु | म | हा | र | ण्यं |
| चि | र | रा | त्रा | य | रा | घ | वे |
| ब | भू | व | न | ग | रे | मू | र्च्छा |
| ब | ल | मू | र्च्छा | ज | न | स्य | च |