अन्वयः
तत् पुरम् that city, मत्तसङ्कुपितद्विपम् with elephants intoxicated and provoked (by sounds), हयशिञ्जितनिर्घोषम् the tinkling of bells and the neighing of the horses, महास्वनम् mighty roar, आकुलसम्भ्रान्तम् आसीत् became flurried and distressed.
Summary
The city was distressed and flurried by the intoxicated elephants, provoked by the mighty sound of the tinkling of bells and the neighing of the horses.
पदच्छेदः
| तत् | तद् (१.१) |
| समाकुलसंभ्रान्तं | समाकुल–संभ्रान्त (√सम्-भ्रम् + क्त, १.१) |
| मत्तसंकुपितद्विपम् | मत्त (√मद् + क्त)–संकुपित (√सम्-कुप् + क्त)–द्विप (१.१) |
| हयशिञ्जितनिर्घोषं | हय–शिञ्जित–निर्घोष (१.१) |
| पुरम् | पुर (१.१) |
| आसीन् | आसीत् (√अस् लङ् प्र.पु. एक.) |
| महास्वनम् | महत्–स्वन (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | त्स | मा | कु | ल | सं | भ्रा | न्तं |
| म | त्त | सं | कु | पि | त | द्वि | पम् |
| ह | य | शि | ञ्जि | त | नि | र्घो | षं |
| पु | र | मा | सी | न्म | हा | स्व | नम् |