अन्वयः
कैकेय्या by Kaikeyi, क्लिश्यमानेन by being tormented, राज्ञा by the king, वनम् to the forest, सञ्चोदितः one ordered, अस्य जनस्य of these people, जगतः of the whole world, परित्राता protector, Rama, क्व नु where, गच्छति is he going?
Summary
Tormented by Kaikeyi, the king ordered him to go to the forest. Where is he, who happened to be the protector of the people of this world, going now?
पदच्छेदः
| कैकेय्या | कैकेयी (३.१) |
| क्लिश्यमानेन | क्लिश्यमान (√क्लिश् + शानच्, ३.१) |
| राज्ञा | राजन् (३.१) |
| संचोदितो | संचोदित (√सम्-चोदय् + क्त, १.१) |
| वनम् | वन (२.१) |
| परित्राता | परित्रातृ (१.१) |
| जनस्यास्य | जन (६.१)–इदम् (६.१) |
| जगतः | जगन्त् (६.१) |
| क्व | क्व (अव्ययः) |
| नु | नु (अव्ययः) |
| गच्छति | गच्छति (√गम् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| कै | के | य्या | क्लि | श्य | मा | ने | न |
| रा | ज्ञा | सं | चो | दि | तो | व | नम् |
| प | रि | त्रा | ता | ज | न | स्या | स्य |
| ज | ग | तः | क्व | नु | ग | च्छ | ति |