अन्वयः
तस्य that Rama, निर्यतः as he was going, रजोरूपम् the form of dust, यावत् as long as, अदृश्यत was visible, तावत् so long, इक्ष्वाकुवरः the best of Ikshvaku dynasty, king Dasaratha, आत्मचक्षुषी his eyes, नैव सञ्जहार did not withdraw.
Summary
As long as the dust raised by the wheels of the chariot of Rama (who was departing to the forest) was visible, Dasaratha, the best of the Ikshvakus, could not withdraw his eyes (from Rama).
पदच्छेदः
| यावत् | यावत् (अव्ययः) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| निर्यतस् | निर्यत् (√निः-इ + शतृ, ६.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| रजोरूपम् | रजस्–रूप (१.१) |
| अदृश्यत | अदृश्यत (√दृश् लङ् प्र.पु. एक.) |
| नैवेक्ष्वाकुवरस् | न (अव्ययः)–एव (अव्ययः)–इक्ष्वाकु–वर (१.१) |
| तावत् | तावत् (अव्ययः) |
| संजहारात्मचक्षुषी | संजहार (√सम्-हृ लिट् प्र.पु. एक.)–आत्मन्–चक्षुस् (२.२) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| या | व | त्तु | नि | र्य | त | स्त | स्य |
| र | जो | रू | प | म | दृ | श्य | त |
| नै | वे | क्ष्वा | कु | व | र | स्ता | व |
| त्सं | ज | हा | रा | त्म | च | क्षु | षी |