पदच्छेदः
| नानापण्यसमृद्धेषु | नाना (अव्ययः)–पण्य–समृद्ध (√सम्-ऋध् + क्त, ७.३) |
| वणिजाम् | वणिज् (६.३) |
| आपणेषु | आपण (७.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| कुटुम्बिनां | कुटुम्बिन् (६.३) |
| समृद्धेषु | समृद्ध (√सम्-ऋध् + क्त, ७.३) |
| श्रीमत्सु | श्रीमत् (७.३) |
| भवनेषु | भवन (७.३) |
| च | च (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ना | ना | प | ण्य | स | मृ | द्धे | षु |
| व | णि | जा | मा | प | णे | षु | च |
| कु | टु | म्बि | नां | स | मृ | द्धे | षु |
| श्री | म | त्सु | भ | व | ने | षु | च |