नरो यानेन यः स्वप्ने खरयुक्तेन याति हि ।
अचिरात्तस्य धूमाग्रं चितायां संप्रदृश्यते ।
एतन्निमित्तं दीनोऽहं तन्न वः प्रतिपूजये ॥
नरो यानेन यः स्वप्ने खरयुक्तेन याति हि ।
अचिरात्तस्य धूमाग्रं चितायां संप्रदृश्यते ।
एतन्निमित्तं दीनोऽहं तन्न वः प्रतिपूजये ॥
अन्वयः
स्वप्ने in the dream, यः any one, नरः human, रस्वयुक्तेन yoked to asses, यानेन by carriage, याति sets out, अचिरात् in a short time, चितायाम् on the funeral pyre, तस्य his, धूमाग्रम् wreath of smoke of his deadbody ascending, सम्प्रदृश्यते will be seen.M N Dutt
The smoke of the funeral pyre of him will be shortly visible that goes in the car yoked with asses. It is for this reason that I am poor of spirit, and that I do not respond to your words. Further, my throat is parched, and my mind ill at ease.Summary
If one beholds in a dream a person setting out on a carriage yoked to asses, the wreath of smoke ascending from his funeral pyre will be seen soon.पदच्छेदः
| नरो | नर (१.१) |
| यानेन | यान (३.१) |
| यः | यद् (१.१) |
| स्वप्ने | स्वप्न (७.१) |
| खरयुक्तेन | खर–युक्त (√युज् + क्त, ३.१) |
| याति | याति (√या लट् प्र.पु. एक.) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| अचिरात् | अचिरात् (अव्ययः) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| धूमाग्रं | धूम–अग्र (१.१) |
| चितायां | चिता (७.१) |
| सम्प्रदृश्यते | सम्प्रदृश्यते (√सम्प्र-दृश् प्र.पु. एक.) |
| एतन्निमित्तं | एतद्–निमित्त (२.१) |
| दीनो | दीन (१.१) |
| ऽहं | मद् (१.१) |
| तन् | तद् (२.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| वः | त्वद् (२.३) |
| प्रतिपूजये | प्रतिपूजये (√प्रति-पूजय् लट् उ.पु. ) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | रो | या | ने | न | यः | स्व | प्ने | ख | र | यु | क्ते |
| न | या | ति | हि | अ | चि | रा | त्त | स्य | धू | मा | ग्रं |
| चि | ता | यां | सं | प्र | दृ | श्य | ते | ए | त | न्नि | मि |
| त्तं | दी | नो | ऽहं | त | न्न | वः | प्र | ति | पू | ज | ये |