पदच्छेदः
| अविदूरे | अविदूर (७.१) |
| स्थितां | स्थित (√स्था + क्त, २.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| धात्रीं | धात्री (२.१) |
| पप्रच्छ | पप्रच्छ (√प्रच्छ् लिट् प्र.पु. एक.) |
| मन्थरा | मन्थरा (१.१) |
| उत्तमेनाभिसंयुक्ता | उत्तम (३.१)–अभिसंयुक्त (√अभिसम्-युज् + क्त, १.१) |
| हर्षेणार्थपरा | हर्ष (३.१)–अर्थ–पर (१.१) |
| सती | सती (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | वि | दू | रे | स्थि | तां | दृ | ष्ट्वा |
| धा | त्रीं | प | प्र | च्छ | म | न्थ | रा |
| उ | त्त | मे | ना | भि | सं | यु | क्ता |
| ह | र्षे | णा | र्थ | प | रा | स | ती |