अन्वयः
मन्थरा तु as for Manthara, एनाम् about her, अभ्यसूय having been disgusted, कोपदु:ख समन्विता filled with rage and sorrow, तत् that, आभरणम् ornament, उत्सृज्य having discarded, तत: after that, इदम् वाक्यं this word, उवाच said.
Summary
Annoyed with Kaikeyi and filled with rage and sorrow, Manthara discarded the ornament (gifted to her) and said these words:
पदच्छेदः
| मन्थरा | मन्थरा (१.१) |
| त्व् | तु (अव्ययः) |
| अभ्यसूय्यैनाम् | अभ्यसूय्य (√अभ्यसूय् + क्त्वा)–एनद् (२.१) |
| उत्सृज्याभरणं | उत्सृज्य (√उत्-सृज् + ल्यप्)–आभरण (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| तत् | तद् (२.१) |
| उवाचेदं | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.)–इदम् (२.१) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| कोपदुःखसमन्विता | कोप–दुःख–समन्वित (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| म | न्थ | रा | त्व | भ्य | सू | य्यै | ना |
| मु | त्सृ | ज्या | भ | र | णं | च | तत् |
| उ | वा | चे | दं | त | तो | वा | क्यं |
| को | प | दुः | ख | स | म | न्वि | ता |