२.८८.९

काश्मर्यरिष्टवरणैर्मधूकैस्तिलकैस्तथा ।
बदर्यामलकैर्नीपैर्वेत्रधन्वनबीजकैः ॥

पदच्छेदः

काश्मर्यरिष्टवरणैर्काश्मरी–अरिष्ट–वरण (३.३)
मधूकैस्मधूक (३.३)
तिलकैस्तिलक (३.३)
तथातथा (अव्ययः)
बदर्यामलकैर्बदरी–आमलक (३.३)
नीपैर्नीप (३.३)
वेत्रधन्वनबीजकैःवेत्र–धन्वन–बीजक (३.३)

छन्दः

अनुष्टुप् [८]

छन्दोविश्लेषणम्

का श्मर्य रिष्ट णै
र्म धू कैस्ति कैस्त था
र्या कै र्नी पै
र्वेत्रन्व बी कैः