पदच्छेदः
| मङ्गलस्याप्रयोगं | मङ्गल (६.१)–अप्रयोग (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| प्रत्युत्थानं | प्रत्युत्थान (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| सर्वशः | सर्वशस् (अव्ययः) |
| कच्चित् | कच्चित् (अव्ययः) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| वर्जयस्य् | वर्जयसि (√वर्जय् लट् म.पु. ) |
| एतान् | एतद् (२.३) |
| राजदोषांश् | राजन्–दोष (२.३) |
| चतुर्दश | चतुर्दशन् (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | ङ्ग | ल | स्या | प्र | यो | गं | च |
| प्र | त्यु | त्था | नं | च | स | र्व | शः |
| क | च्चि | त्त्वं | व | र्ज | य | स्ये | ता |
| न्रा | ज | दो | षां | श्च | तु | र्द | श |