तदद्भुतं स्थैर्यमवेक्ष्य राघवे; समं जनो हर्षमवाप दुःखितः ।
न यात्ययोध्यामिति दुःखितोऽभव;त्स्थिरप्रतिज्ञत्वमवेक्ष्य हर्षितः ॥
तदद्भुतं स्थैर्यमवेक्ष्य राघवे; समं जनो हर्षमवाप दुःखितः ।
न यात्ययोध्यामिति दुःखितोऽभव;त्स्थिरप्रतिज्ञत्वमवेक्ष्य हर्षितः ॥
अन्वयः
राघवे in Rama, अद्भुतम् that wonderful, तत् स्थैर्यम् that determination, अवेक्ष्य having seen, जनः all men, दुःखितः anguished, समम् simultaneously, हर्षम् delight, अवाप obtained, अयोध्याम् to Ayodhya, न याति will not go, इति thus, दुःखितः अभवत् were grieved, स्थिरप्रतिज्ञत्वम् firmness of resolve, अवेक्ष्य having seen, हर्षितः were delighted.Summary
Having seen the wonderful deternmination of Rama, people were, at once, anguished and delighted, anguished because he would not return to Ayodhya, and delighted because he was firm in his resolve.पदच्छेदः
| तद् | तद् (२.१) |
| अद्भुतं | अद्भुत (२.१) |
| स्थैर्यम् | स्थैर्य (२.१) |
| अवेक्ष्य | अवेक्ष्य (√अव-ईक्ष् + ल्यप्) |
| राघवे | राघव (७.१) |
| समं | सम (२.१) |
| जनो | जन (१.१) |
| हर्षम् | हर्ष (२.१) |
| अवाप | अवाप (√अव-आप् लिट् प्र.पु. एक.) |
| दुःखितः | दुःखित (१.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| यात्य् | याति (√या लट् प्र.पु. एक.) |
| अयोध्याम् | अयोध्या (२.१) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| दुःखितो | दुःखित (१.१) |
| ऽभवत् | अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.) |
| स्थिरप्रतिज्ञत्वम् | स्थिरप्रतिज्ञ–त्व (२.१) |
| अवेक्ष्य | अवेक्ष्य (√अव-ईक्ष् + ल्यप्) |
| हर्षितः | हर्षित (√हर्षय् + क्त, १.१) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | द | द्भु | तं | स्थै | र्य | म | वे | क्ष्य | रा | घ | वे |
| स | मं | ज | नो | ह | र्ष | म | वा | प | दुः | खि | तः |
| न | या | त्य | यो | ध्या | मि | ति | दुः | खि | तो | ऽभ | व |
| त्स्थि | र | प्र | ति | ज्ञ | त्व | म | वे | क्ष्य | ह | र्षि | तः |
| ज | त | ज | र | ||||||||