पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| यदा | यदा (अव्ययः) |
| पुष्पितो | पुष्पित (१.१) |
| भूत्वा | भूत्वा (√भू + क्त्वा) |
| फलानि | फल (२.३) |
| न | न (अव्ययः) |
| विदर्शयेत् | विदर्शयेत् (√वि-दर्शय् विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| स | तद् (१.१) |
| तां | तद् (२.१) |
| नानुभवेत् | न (अव्ययः)–अनुभवेत् (√अनु-भू विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| प्रीतिं | प्रीति (२.१) |
| यस्य | यद् (६.१) |
| हेतोः | हेतु (५.१) |
| प्रभावितः | प्रभावित (√प्र-भावय् + क्त, १.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | य | दा | पु | ष्पि | तो | भू | त्वा |
| फ | ला | नि | न | वि | द | र्श | येत् |
| स | तां | ना | नु | भ | वे | त्प्री | तिं |
| य | स्य | हे | तोः | प्र | भा | वि | तः |