छायां ते दिनकरभाः प्रबाधमानं; वर्षत्रं भरत करोतु मूर्ध्नि शीताम् ।
एतेषामहमपि काननद्रुमाणां; छायां तामतिशयिनीं सुखं श्रयिष्ये ॥
छायां ते दिनकरभाः प्रबाधमानं; वर्षत्रं भरत करोतु मूर्ध्नि शीताम् ।
एतेषामहमपि काननद्रुमाणां; छायां तामतिशयिनीं सुखं श्रयिष्ये ॥
अन्वयः
भरत O Bharata, वर्षत्रम् an umbrella, दिनकरभाः the sunshine, प्रबाधमानाम् repelling, ते मूर्ध्नि over your head, शीताम् cool, छायाम् shade, करोतु let it provide, अहमपि I also, सुखी one with happiness, एतेषाम् these, काननद्रुमाणाम् woodland trees, अतिशयिनीम् dense, ताम् in that, छायाम् shade, श्रयिष्ये shall take refuge.Summary
Let an umbrella protect you against (scorching) sunshine and provide its cool shade over your head, O Bharata As for me, I shall happily seek the shade of these dense woodland trees.पदच्छेदः
| छायां | छाया (२.१) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| दिनकरभाः | दिनकर–भास् (१.१) |
| प्रबाधमानं | प्रबाधमान (√प्र-बाध् + शानच्, २.१) |
| वर्षत्रं | वर्षत्र (२.१) |
| भरत | भरत (८.१) |
| करोतु | करोतु (√कृ लोट् प्र.पु. एक.) |
| मूर्ध्नि | मूर्धन् (७.१) |
| शीताम् | शीत (२.१) |
| एतेषाम् | एतद् (६.३) |
| अहम् | मद् (१.१) |
| अपि | अपि (अव्ययः) |
| काननद्रुमाणां | कानन–द्रुम (६.३) |
| छायां | छाया (२.१) |
| ताम् | तद् (२.१) |
| अतिशयिनीं | अतिशयिन् (२.१) |
| सुखं | सुखम् (अव्ययः) |
| श्रयिष्ये | श्रयिष्ये (√श्रि लृट् उ.पु. ) |
छन्दः
प्रहर्षिणी [१३: मनजरग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| छा | यां | ते | दि | न | क | र | भाः | प्र | बा | ध | मा | नं |
| व | र्ष | त्रं | भ | र | त | क | रो | तु | मू | र्ध्नि | शी | ताम् |
| ए | ते | षा | म | ह | म | पि | का | न | न | द्रु | मा | णां |
| छा | यां | ता | म | ति | श | यि | नीं | सु | खं | श्र | यि | ष्ये |
| म | न | ज | र | ग | ||||||||