पदच्छेदः
| प्रविष्टौ | प्रविष्ट (√प्र-विश् + क्त, १.२) |
| दण्डकारण्यं | दण्डक–अरण्य (२.१) |
| शरचापासिधारिणौ | शर–चाप–असि–धारिन् (१.२) |
| कथं | कथम् (अव्ययः) |
| तापसयोर् | तापस (६.२) |
| वां | त्वद् (६.२) |
| च | च (अव्ययः) |
| वासः | वास (१.१) |
| प्रमदया | प्रमदा (३.१) |
| सह | सह (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | वि | ष्टौ | द | ण्ड | का | र | ण्यं |
| श | र | चा | पा | सि | धा | रि | णौ |
| क | थं | ता | प | स | यो | र्वां | च |
| वा | सः | प्र | म | द | या | स | ह |