चरामि सायुधो नित्यमृषिमांसानि भक्षयन् ।
इयं नारी वरारोहा मम भर्या भविष्यति ।
युवयोः पापयोश्चाहं पास्यामि रुधिरं मृधे ॥
चरामि सायुधो नित्यमृषिमांसानि भक्षयन् ।
इयं नारी वरारोहा मम भर्या भविष्यति ।
युवयोः पापयोश्चाहं पास्यामि रुधिरं मृधे ॥
अन्वयः
वरारोहा a beautiful woman (with fine hips), इयं नारी this woman, मम my, भार्या wife, भविष्यति will be, अहम् I, मृधे in the fight, पापयोः of both of you sinners, युवयोः of you both, रुधिरम् blood, पास्यामि I shall drink.Summary
This woman of fine hips shall be my wife. You sinners I shall drink the blood of both of you in the fight.पदच्छेदः
| चरामि | चरामि (√चर् लट् उ.पु. ) |
| सायुधो | स (अव्ययः)–आयुध (१.१) |
| नित्यम् | नित्यम् (अव्ययः) |
| ऋषिमांसानि | ऋषि–मांस (२.३) |
| भक्षयन् | भक्षयत् (√भक्षय् + शतृ, १.१) |
| इयं | इदम् (१.१) |
| नारी | नारी (१.१) |
| वरारोहा | वर–आरोह (१.१) |
| मम | मद् (६.१) |
| भार्या | भार्या (१.१) |
| भविष्यति | भविष्यति (√भू लृट् प्र.पु. एक.) |
| युवयोः | त्वद् (६.२) |
| पापयोश् | पाप (६.२) |
| चाहं | च (अव्ययः)–मद् (१.१) |
| पास्यामि | पास्यामि (√पा लृट् उ.पु. ) |
| रुधिरं | रुधिर (२.१) |
| मृधे | मृध (७.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| च | रा | मि | सा | यु | धो | नि | त्य | मृ | षि | मां | सा |
| नि | भ | क्ष | यन् | इ | यं | ना | री | व | रा | रो | हा |
| म | म | भ | र्या | भ | वि | ष्य | ति | यु | व | योः | पा |
| प | यो | श्चा | हं | पा | स्या | मि | रु | धि | रं | मृ | धे |