पदच्छेदः
| उच्छेत्तारं | उच्छेत्तृ (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| धर्माणां | धर्म (६.३) |
| परदाराभिमर्शनम् | परदार–अभिमर्शन (२.१) |
| सर्वदिव्यास्त्रयोक्तारं | सर्व–दिव्य–अस्त्र–योक्तृ (२.१) |
| यज्ञविघ्नकरं | यज्ञ–विघ्न–कर (२.१) |
| सदा | सदा (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | च्छे | त्ता | रं | च | ध | र्मा | णां |
| प | र | दा | रा | भि | म | र्श | नम् |
| स | र्व | दि | व्या | स्त्र | यो | क्ता | रं |
| य | ज्ञ | वि | घ्न | क | रं | स | दा |