पदच्छेदः
| वसन्ति | वसन्ति (√वस् लट् प्र.पु. बहु.) |
| मन्नियोगेन | मद्–नियोग (३.१) |
| अधिवासं | अधिवास (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| राक्षसः | राक्षस (१.१) |
| बाधमाना | बाधमान (√बाध् + शानच्, १.३) |
| महारण्ये | महत्–अरण्य (७.१) |
| मुनीन् | मुनि (२.३) |
| ये | यद् (१.३) |
| धर्मचारिणः | धर्म–चारिन् (२.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | स | न्ति | म | न्नि | यो | गे | न |
| अ | धि | वा | सं | च | रा | क्ष | सः |
| बा | ध | मा | ना | म | हा | र | ण्ये |
| मु | नी | न्ये | ध | र्म | चा | रि | णः |