पदच्छेदः
| किंचिद् | कश्चित् (२.१) |
| अभ्युन्नतग्रीव | अभ्युन्नत (√अभ्युद्-नम् + क्त)–ग्रीवा (१.१) |
| इन्द्रनीलनिभोदरः | इन्द्रनील–निभ–उदर (१.१) |
| मधूकनिभपार्श्वश् | मधूक–निभ–पार्श्व (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| कञ्जकिञ्जल्कसंनिभः | कञ्ज–किञ्जल्क–संनिभ (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| किं | चि | द | भ्यु | न्न | त | ग्री | व |
| इ | न्द्र | नी | ल | नि | भो | द | रः |
| म | धू | क | नि | भ | पा | र्श्व | श्च |
| क | ञ्ज | कि | ञ्ज | ल्क | सं | नि | भः |