इतीव तद्वाक्यमदुष्टभावा; सुदृष्टमुक्त्वा रजनीचरं तम् ।
गात्रप्रकम्पाद्व्यथिता बभूव; वातोद्धता सा कदलीव तन्वी ॥
इतीव तद्वाक्यमदुष्टभावा; सुदृष्टमुक्त्वा रजनीचरं तम् ।
गात्रप्रकम्पाद्व्यथिता बभूव; वातोद्धता सा कदलीव तन्वी ॥
अन्वयः
अदुष्टभावा pure in thought, तन्वी slim, सा that, सुदुष्टम् forcefully, तं रजनीचरम् nightwalker, तत् that, वाक्यम् words, इति thus, उक्त्वा said, गात्रप्रकम्पात् due to trembling of the body, वातोद्धता shaken by violent wind, कदलीव banana, व्यथिता distressed, बभूव became.M N Dutt
Addressing those words to that wicked ranger of the night, that innocent ($ītā) shook like a plantain tree shaken by the wind.Summary
Having said thus to the wicked nightwalker Ravana, Sita, pure in thought remained distressed.Her slender body started trembling like a banana plant becomes shaken by a violent wind.पदच्छेदः
| इतीव | इति (अव्ययः)–इव (अव्ययः) |
| तद् | तद् (२.१) |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) |
| अदुष्टभावा | अदुष्ट–भाव (१.१) |
| सुदृष्टम् | सु (अव्ययः)–दृष्ट (√दृश् + क्त, २.१) |
| उक्त्वा | उक्त्वा (√वच् + क्त्वा) |
| रजनीचरं | रजनीचर (२.१) |
| तम् | तद् (२.१) |
| गात्रप्रकम्पाद् | गात्र–प्रकम्प (५.१) |
| व्यथिता | व्यथित (√व्यथ् + क्त, १.१) |
| बभूव | बभूव (√भू लिट् प्र.पु. एक.) |
| वातोद्धता | वात–उद्धत (√उत्-हन् + क्त, १.१) |
| सा | तद् (१.१) |
| कदलीव | कदल (१.१)–इव (अव्ययः) |
| तन्वी | तनु (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | ती | व | त | द्वा | क्य | म | दु | ष्ट | भा | वा |
| सु | दृ | ष्ट | मु | क्त्वा | र | ज | नी | च | रं | तम् |
| गा | त्र | प्र | क | म्पा | द्व्य | थि | ता | ब | भू | व |
| वा | तो | द्ध | ता | सा | क | द | ली | व | त | न्वी |