तां वेपमानामुपलक्ष्य सीतां; स रावणो मृत्युसमप्रभावः ।
कुलं बलं नाम च कर्म चात्मनः; समाचचक्षे भयकारणार्थम् ॥
तां वेपमानामुपलक्ष्य सीतां; स रावणो मृत्युसमप्रभावः ।
कुलं बलं नाम च कर्म चात्मनः; समाचचक्षे भयकारणार्थम् ॥
अन्वयः
मृत्युसमप्रभावः powerful like death, सः that, रावणः Ravana, वेपमानाम् trembling, ताम् she, उपलक्ष्य beholding, भयकारणार्थम् to create more fear, आत्मनः of himself, कुलम् clan, बलं च and strength, कर्म च deeds, समाचचक्षे gave an account of.M N Dutt
There upon Rāvaņa, like to Death in prowess, trembling, began to relate to her with a view to frighten (her) his race, power, name and actions.Summary
Beholding Sita who was trembling, Ravana, powerful like death, started telling about himself, his clan, his strength and his deeds to instil more fear in her.इत्तयार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अरण्यकाण्डे सप्तचत्वारिंशस्सर्गः॥Thus ends the fortyseventh sarga of Aranyakanda of the holy Ramayana the first epic composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| तां | तद् (२.१) |
| वेपमानाम् | वेपमान (√विप् + शानच्, २.१) |
| उपलक्ष्य | उपलक्ष्य (√उप-लक्षय् + ल्यप्) |
| सीतां | सीता (२.१) |
| स | तद् (१.१) |
| रावणो | रावण (१.१) |
| मृत्युसमप्रभावः | मृत्यु–सम–प्रभाव (१.१) |
| कुलं | कुल (२.१) |
| बलं | बल (२.१) |
| नाम | नामन् (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| कर्म | कर्मन् (२.१) |
| चात्मनः | च (अव्ययः)–आत्मन् (६.१) |
| समाचचक्षे | समाचचक्षे (√समा-चक्ष् लिट् प्र.पु. एक.) |
| भयकारणार्थम् | भय–कारण–अर्थ (२.१) |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तां | वे | प | मा | ना | मु | प | ल | क्ष्य | सी | तां | |
| स | रा | व | णो | मृ | त्यु | स | म | प्र | भा | वः | |
| कु | लं | ब | लं | ना | म | च | क | र्म | चा | त्म | नः |
| स | मा | च | च | क्षे | भ | य | का | र | णा | र्थम् | |
| ज | त | ज | ग | ग | |||||||