अन्वयः
जनस्थाने in Janasthana, सुपुष्पितान् blossomed, कर्णिकारान् karnikara trees, आमन्त्रये pray, रावणः Ravana, सीताम् Sita, हरति is abducting, क्षिप्रम् at once, रामाय to Rama, शंसध्वम् tell him.
M N Dutt
I invoke you, O Godāvarī, having swans and cranes sporting in your stream, to tell Ráma that Rāvana has stolen away Sītã.
Summary
O karnikar trees in full bloom in Janasthana, tell Rama quickly that Ravana is kidnapping Sita.
पदच्छेदः
| माल्यवन्तं | माल्यवन्त् (२.१) |
| शिखरिणं | शिखरिन् (२.१) |
| वन्दे | वन्दे (√वन्द् लट् उ.पु. ) |
| प्रस्रवणं | प्रस्रवण (२.१) |
| गिरिम् | गिरि (२.१) |
| यत्र | यत्र (अव्ययः) |
| रामस्य | राम (६.१) |
| वैदेहीं | वैदेही (२.१) |
| भार्यां | भार्या (२.१) |
| हरति | हरति (√हृ लट् प्र.पु. एक.) |
| रावणः | रावण (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| मा | ल्य | व | न्तं | शि | ख | रि | णं |
| व | न्दे | प्र | स्र | व | णं | गि | रिम् |
| क्षि | प्रं | रा | मा | य | शं | स | ध्वं |
| सी | तां | ह | र | ति | रा | व | णः |