अन्वयः
सीताहरणकर्शितः tormented by Sita's abduction, सः रामः Rama, एवम् thus, विलपन् cried, दीनः was dejected, शोकसमाविष्टः overpowered by grief, मुहूर्तम् for a moment, विह्वलः consciousess lost, अभवत् became.
Summary
Thus tormented by the abduction of Sita, Rama felt dejected and cried.Overpowered by grief he lost his consciousness for a moment.
पदच्छेदः
| एवं | एवम् (अव्ययः) |
| स | तद् (१.१) |
| विलपन् | विलपत् (√वि-लप् + शतृ, १.१) |
| रामः | राम (१.१) |
| सीताहरणकर्शितः | सीता–आहरण–कर्शित (√कर्शय् + क्त, १.१) |
| दीनः | दीन (१.१) |
| शोकसमाविष्टो | शोक–समाविष्ट (√समा-विश् + क्त, १.१) |
| मुहूर्तं | मुहूर्त (२.१) |
| विह्वलो | विह्वल (१.१) |
| ऽभवत् | अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | वं | स | वि | ल | प | न्रा | मः |
| सी | ता | ह | र | ण | क | र्शि | तः |
| दी | नः | शो | क | स | मा | वि | ष्टो |
| मु | हू | र्तं | वि | ह्व | लो | ऽभ | वत् |