परिश्रान्तस्य मे पक्षौ छित्त्वा खड्गेन रावणः ।
सीतामादाय वैदेहीमुत्पपात विहायसं ।
रक्षसा निहतं पूर्व्म न मां हन्तुं त्वमर्हसि ॥
परिश्रान्तस्य मे पक्षौ छित्त्वा खड्गेन रावणः ।
सीतामादाय वैदेहीमुत्पपात विहायसं ।
रक्षसा निहतं पूर्व्म न मां हन्तुं त्वमर्हसि ॥
अन्वयः
अयं तु he is, युधि in the battle, मत्पक्षनिहतः killed by my wings, तस्य सारथिः his charioteer, रावणः Ravana, परिश्रान्तस्य an exhausted one, मे my, पक्षौ both wings, खड्गेन with a sword, छित्त्वा having cut, वैदेहीम् Vaidehi, सीताम् Sita, आदाय after taking, विहायसम् into the sky, उत्पपात flew up, रक्षसा by Ravana, पूर्वम् earlier, निहतम् slain, माम् me, त्वम् you, हन्तुम् to kill, नार्हसि not proper.Summary
He is Ravana's charioteer slain by my wings in the battle. As I was exhausted in the encounter Ravana clipped my wings, took Sita, and flew into the sky. You need not kill me. I am already slain by the demon.पदच्छेदः
| परिश्रान्तस्य | परिश्रान्त (√परि-श्रम् + क्त, ६.१) |
| मे | मद् (६.१) |
| पक्षौ | पक्ष (२.२) |
| छित्त्वा | छित्त्वा (√छिद् + क्त्वा) |
| खड्गेन | खड्ग (३.१) |
| रावणः | रावण (१.१) |
| सीताम् | सीता (२.१) |
| आदाय | आदाय (√आ-दा + ल्यप्) |
| वैदेहीम् | वैदेही (२.१) |
| उत्पपात | उत्पपात (√उत्-पत् लिट् प्र.पु. एक.) |
| विहायसम् | विहायस् (२.१) |
| रक्षसा | रक्षस् (३.१) |
| निहतं | निहत (√नि-हन् + क्त, २.१) |
| पूर्वं | पूर्वम् (अव्ययः) |
| न | न (अव्ययः) |
| मां | मद् (२.१) |
| हन्तुं | हन्तुम् (√हन् + तुमुन्) |
| त्वम् | त्वद् (१.१) |
| अर्हसि | अर्हसि (√अर्ह् लट् म.पु. ) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | रि | श्रा | न्त | स्य | मे | प | क्षौ | छि | त्त्वा | ख | ड्गे |
| न | रा | व | णः | सी | ता | मा | दा | य | वै | दे | ही |
| मु | त्प | पा | त | वि | हा | य | सं | र | क्ष | सा | नि |
| ह | तं | पू | र्व्म | न | मां | ह | न्तुं | त्व | म | र्ह | सि |