अन्वयः
धर्मात्मा righteous, रामः Rama, एवम् in that way, उक्त्वा having said, पतगेश्वरम् lord of birds, चिताम् on the pyre, आरोप्य having laid, दुःखितः sorrowful, स्वबन्धुमिव like his own relation, ददाह cremated.
Summary
Thus said, righteous Rama laid him on the pyre and sadly cremated the lord of the birds as one would do to his own relative.
पदच्छेदः
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| उक्त्वा | उक्त्वा (√वच् + क्त्वा) |
| चितां | चिता (२.१) |
| दीप्ताम् | दीप्त (√दीप् + क्त, २.१) |
| आरोप्य | आरोप्य (√आ-रोपय् + ल्यप्) |
| पतगेश्वरम् | पतग–ईश्वर (२.१) |
| ददाह | ददाह (√दह् लिट् प्र.पु. एक.) |
| रामो | राम (१.१) |
| धर्मात्मा | धर्म–आत्मन् (१.१) |
| स्वबन्धुम् | स्व–बन्धु (२.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| दुःखितः | दुःखित (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | व | मु | क्त्वा | चि | तां | दी | प्ता |
| मा | रो | प्य | प | त | गे | श्व | रम् |
| द | दा | ह | रा | मो | ध | र्मा | त्मा |
| स्व | ब | न्धु | मि | व | दुः | खि | तः |