पदच्छेदः
| घोरौ | घोर (२.२) |
| भुजौ | भुज (२.२) |
| विकुर्वाणम् | विकुर्वाण (√वि-कृ + शानच्, २.१) |
| उभौ | उभ् (२.२) |
| योजनम् | योजन (२.१) |
| आयतौ | आयत (√आ-यम् + क्त, २.२) |
| कराभ्यां | कर (३.२) |
| विविधान् | विविध (२.३) |
| गृह्य | गृह्य (√ग्रह् + क्त्वा) |
| ऋक्षान् | ऋक्ष (२.३) |
| पक्षिगणान् | पक्षिन्–गण (२.३) |
| मृगान् | मृग (२.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| घो | रौ | भु | जौ | वि | कु | र्वा | ण |
| मु | भौ | यो | ज | न | मा | य | तौ |
| क | रा | भ्यां | वि | वि | धा | न्गृ | ह्य |
| ऋ | ष्का | न्प | क्षि | ग | णा | न्मृ | गान् |