अन्वयः
व्योमं sky, गतविद्युद्वलाहकम् rid of clouds and lightning, सारसारवसङ्घुष्टम् filled with the cackle of flocks of Sarasa cranes, विमलम् clear, दृष्ट्वा च on glancing, आर्तया in a pitiable, गिरा tone, विललाप cried.
Summary
Looking at the sky rid of clouds and lightning, filled with the sounds of flocks of sarasa birds, Rama cried in a pitiable state.
पदच्छेदः
| समीक्ष्य | समीक्ष्य (√सम्-ईक्ष् + ल्यप्) |
| विमलं | विमल (२.१) |
| व्योम | व्योमन् (२.१) |
| गतविद्युद्बलाहकम् | गत (√गम् + क्त)–विद्युत्–बलाहक (२.१) |
| सारसारवसंघुष्टं | सारस–आरव–संघुष्ट (√सम्-घुष् + क्त, २.१) |
| रम्यज्योत्स्नानुलेपनम् | रम्य (√रम् + क्त्वा)–ज्योत्स्ना–अनुलेपन (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | मी | क्ष्य | वि | म | लं | व्यो | म |
| ग | त | वि | द्यु | द्ब | ला | ह | कम् |
| सा | र | सा | र | व | सं | घु | ष्टं |
| र | म्य | ज्यो | त्स्ना | नु | ले | प | नम् |