पदच्छेदः
| त्रासयन्तौ | त्रासयत् (√त्रासय् + शतृ, १.२) |
| मृगगणान् | मृग–गण (२.३) |
| अन्यांश् | अन्य (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| वनचारिणः | वन–चारिन् (२.३) |
| पम्पातीररुहान् | पम्पा–तीर–रुह (२.३) |
| वृक्षान् | वृक्ष (२.३) |
| वीक्षमाणौ | वीक्षमाण (√वि-ईक्ष् + शानच्, १.२) |
| समन्ततः | समन्ततः (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्रा | स | य | न्तौ | मृ | ग | ग | णा |
| न | न्यां | श्च | व | न | चा | रि | णः |
| प | म्पा | ती | र | रु | हा | न्वृ | क्षा |
| न्वी | क्ष | मा | णौ | स | म | न्त | तः |