पदच्छेदः
| अञ्जनाम्बुदसंकाशाः | अञ्जन–अम्बुद–संकाश (१.३) |
| कुञ्जरप्रतिमौजसः | कुञ्जर–प्रतिमा–ओजस् (१.३) |
| अञ्जने | अञ्जन (७.१) |
| पर्वते | पर्वत (७.१) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| ये | यद् (१.३) |
| वसन्ति | वसन्ति (√वस् लट् प्र.पु. बहु.) |
| प्लवंगमाः | प्लवंगम (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ञ्ज | ना | म्बु | द | सं | का | शाः |
| कु | ञ्ज | र | प्र | ति | मौ | ज | सः |
| अ | ञ्ज | ने | प | र | ते | चै | व |
| ये | व | स | न्ति | प्ल | वं | ग | माः |