पदच्छेदः
| तांस् | तद् (२.३) |
| तांस् | तद् (२.३) |
| त्वम् | त्वद् (१.१) |
| आनय | आनय (√आ-नी लोट् म.पु. ) |
| क्षिप्रं | क्षिप्रम् (अव्ययः) |
| पृथिव्यां | पृथिवी (७.१) |
| सर्ववानरान् | सर्व–वानर (२.३) |
| सामदानादिभिः | सामन्–दान–आदि (३.३) |
| कल्पैर् | कल्प (३.३) |
| आशु | आशु (२.१) |
| प्रेषय | प्रेषय (√प्र-इषय् लोट् म.पु. ) |
| वानरान् | वानर (२.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तां | स्तां | स्त्व | मा | न | य | क्षि | प्रं |
| पृ | थि | व्यां | स | र्व | वा | न | रान् |
| सा | म | दा | ना | दि | भिः | क | ल्पै |
| रा | शु | प्रे | ष | य | वा | न | रान् |