एवमुक्तस्तु सुग्रीवो विनतं नाम यूथपम् ।
अब्रवीद्राम साम्निध्ये लक्ष्मणस्य च धीमतः ।
शैलाभं मेघनिर्घोषमूर्जितं प्लवगेश्वरम् ॥
एवमुक्तस्तु सुग्रीवो विनतं नाम यूथपम् ।
अब्रवीद्राम साम्निध्ये लक्ष्मणस्य च धीमतः ।
शैलाभं मेघनिर्घोषमूर्जितं प्लवगेश्वरम् ॥
अन्वयः
एवम् in that way, उक्तः having been asked, सुग्रीवः Sugriva, रामसान्निध्ये in the presence of Rama, धीमतः learned, लक्ष्मणस्य च Lakshmana's, यूथपम् a troop leader, शैलाभम् lofty like a mountain, मेघनिर्घोषम् who roared like a thunderous cloud, ऊर्जितम् wellbuilt body, विनतं नाम called Vinata, प्लवगेश्वरम् lord of monkeys, अब्रवीत् said.Summary
'In response to Rama's desire, Sugriva beckoned a troopleader called Vinata who was wellbuilt and lofty like a mountain. And thundering like a cloud, said to him in the presence of Rama and wise Lakshmana:पदच्छेदः
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| उक्तस् | उक्त (√वच् + क्त, १.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| सुग्रीवो | सुग्रीव (१.१) |
| विनतं | विनत (२.१) |
| नाम | नाम (अव्ययः) |
| यूथपम् | यूथप (२.१) |
| अब्रवीद् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| रामसांनिध्ये | राम–सांनिध्य (७.१) |
| लक्ष्मणस्य | लक्ष्मण (६.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| धीमतः | धीमत् (६.१) |
| शैलाभं | शैल–आभ (२.१) |
| मेघनिर्घोषम् | मेघ–निर्घोष (२.१) |
| ऊर्जितं | ऊर्जित (२.१) |
| प्लवगेश्वरम् | प्लवग–ईश्वर (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | व | मु | क्त | स्तु | सु | ग्री | वो | वि | न | तं | ना |
| म | यू | थ | पम् | अ | ब्र | वी | द्रा | म | सा | म्नि | ध्ये |
| ल | क्ष्म | ण | स्य | च | धी | म | तः | शै | ला | भं | मे |
| घ | नि | र्घो | ष | मू | र्जि | तं | प्ल | व | गे | श्व | रम् |