पदच्छेदः
| अन्वीक्ष्य | अन्वीक्ष्य (√अनु-ईक्ष् + ल्यप्) |
| दण्डकारण्यं | दण्डक–अरण्य (२.१) |
| सपर्वतनदीगुहम् | स (अव्ययः)–पर्वत–नदी–गुहा (२.१) |
| नदीं | नदी (२.१) |
| गोदावरीं | गोदावरी (२.१) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| सर्वम् | सर्व (१.१) |
| एवानुपश्यत | एव (अव्ययः)–अनुपश्यत (√अनु-पश् लोट् म.पु. द्वि.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | न्वी | क्ष्य | द | ण्ड | का | र | ण्यं |
| स | प | र्व | त | न | दी | गु | हम् |
| न | दीं | गो | दा | व | रीं | चै | व |
| स | र्व | मे | वा | नु | प | श्य | त |