पदच्छेदः
| सिद्धिं | सिद्धि (२.१) |
| सर्वाणि | सर्व (१.३) |
| भूतानि | भूत (१.३) |
| भूतानां | भूत (६.३) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| यः | यद् (१.१) |
| प्रभुः | प्रभु (१.१) |
| दास्यन्ति | दास्यन्ति (√दा लृट् प्र.पु. बहु.) |
| मम | मद् (६.१) |
| ये | यद् (१.३) |
| चान्ये | च (अव्ययः)–अन्य (१.३) |
| अदृष्टाः | अदृष्ट (१.३) |
| पथि | पथिन् (७.१) |
| गोचराः | गोचर (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सि | द्धिं | स | र्वा | णि | भू | ता | नि |
| भू | ता | नां | चै | व | यः | प्र | भुः |
| दा | स्य | न्ति | म | म | ये | चा | न्ये |
| अ | दृ | ष्टाः | प | थि | गो | च | राः |