अन्वयः
अथ and then, आम्रवणसञ्छन्नाम् filled with mango groves, लताशतसमाकुलाम् overgrown with hundreds of creepers, वृक्षवाटिकाम् cluster of trees, ज्यामुक्तः released from bow, नाराचः इव like arrow, पुप्लुवे penetrated.
Summary
He penetrated like an arrow released from a bow the cluster of trees covering mango grove and overgrown with hundreds of creepers.
पदच्छेदः
| अथाम्रवणसंछन्नां | अथ (अव्ययः)–आम्रवण–संछन्न (√सम्-छद् + क्त, २.१) |
| लताशतसमावृताम् | लता–शत–समावृत (√समा-वृ + क्त, २.१) |
| ज्यामुक्त | ज्या–मुक्त (√मुच् + क्त, १.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| नाराचः | नाराच (१.१) |
| पुप्लुवे | पुप्लुवे (√प्लु लिट् प्र.पु. एक.) |
| वृक्षवाटिकाम् | वृक्ष–वाटिका (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | था | म्र | व | ण | सं | छ | न्नां |
| ल | ता | श | त | स | मा | वृ | ताम् |
| ज्या | मु | क्त | इ | व | ना | रा | चः |
| पु | प्लु | वे | वृ | क्ष | वा | टि | काम् |