अन्वयः
हनुमान् Hanuman, राक्षसेन्द्रेण by the lord of demons, पालिताम् ruled, विश्वकर्मणा by Visvakarma, निर्मिताम् constructed, आकाशे in the sky, प्लवमानामिव as if moving पुरीम् city, ददर्श saw.
Summary
The city of Lanka, ruled by the lord of demons and built by Visvakarma looked as if it was a city floating in the sky.
पदच्छेदः
| पालितां | पालित (√पालय् + क्त, २.१) |
| राक्षसेन्द्रेण | राक्षस–इन्द्र (३.१) |
| निर्मितां | निर्मित (√निः-मा + क्त, २.१) |
| विश्वकर्मणा | विश्वकर्मन् (३.१) |
| प्लवमानाम् | प्लवमान (√प्लु + शानच्, २.१) |
| इवाकाशे | इव (अव्ययः)–आकाश (७.१) |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| हनुमान् | हनुमन्त् (१.१) |
| पुरीम् | पुरी (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| पा | लि | तां | रा | क्ष | से | न्द्रे | ण |
| नि | र्मि | तां | वि | श्व | क | र्म | णा |
| प्ल | व | मा | ना | मि | वा | का | शे |
| द | द | र्श | ह | नु | मा | न्पु | रीम् |