द्वारमुत्तरमासाद्य चिन्तयामास वानरः ।
कैलासशिखरप्रख्यमालिखन्तमिवाम्बरम् ।
ध्रियमाणमिवाकाशमुच्छ्रितैर्भवनोत्तमैः ॥
द्वारमुत्तरमासाद्य चिन्तयामास वानरः ।
कैलासशिखरप्रख्यमालिखन्तमिवाम्बरम् ।
ध्रियमाणमिवाकाशमुच्छ्रितैर्भवनोत्तमैः ॥
पदच्छेदः
| द्वारम् | द्वार (२.१) |
| उत्तरम् | उत्तर (२.१) |
| आसाद्य | आसाद्य (√आ-सादय् + ल्यप्) |
| चिन्तयामास | चिन्तयामास (√चिन्तय् प्र.पु. एक.) |
| वानरः | वानर (१.१) |
| कैलासशिखरप्रख्यम् | कैलास–शिखर–प्रख्या (२.१) |
| आलिखन्तम् | आलिखत् (√आ-लिख् + शतृ, २.१) |
| इवाम्बरम् | इव (अव्ययः)–अम्बर (२.१) |
| ध्रियमाणम् | ध्रियमाण (√धृ + शानच्, २.१) |
| इवाकाशम् | इव (अव्ययः)–आकाश (२.१) |
| उच्छ्रितैर् | उच्छ्रित (√उत्-श्रि + क्त, ३.३) |
| भवनोत्तमैः | भवन–उत्तम (३.३) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द्वा | र | मु | त्त | र | मा | सा | द्य | चि | न्त | या | मा |
| स | वा | न | रः | कै | ला | स | शि | ख | र | प्र | ख्य |
| मा | लि | ख | न्त | मि | वा | म्ब | रम् | ध्रि | य | मा | ण |
| मि | वा | का | श | मु | च्छ्रि | तै | र्भ | व | नो | त्त | मैः |