शोकानिमित्तानि तदा बहूनि; धैर्यार्जितानि प्रवराणि लोके ।
प्रादुर्निमित्तानि तदा बभूवुः; पुरापि सिद्धान्युपलक्षितानि ॥
शोकानिमित्तानि तदा बहूनि; धैर्यार्जितानि प्रवराणि लोके ।
प्रादुर्निमित्तानि तदा बभूवुः; पुरापि सिद्धान्युपलक्षितानि ॥
पदच्छेदः
| शोकानिमित्तानि | शोक–अनिमित्त (१.३) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| बहूनि | बहु (१.३) |
| धैर्यार्जितानि | धैर्य–अर्जित (√अर्जय् + क्त, १.३) |
| प्रवराणि | प्रवर (१.३) |
| लोके | लोक (७.१) |
| प्रादुर्निमित्तानि | प्रादुर् (अव्ययः)–निमित्त (१.३) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| बभूवुः | बभूवुः (√भू लिट् प्र.पु. बहु.) |
| पुरापि | पुरा (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| सिद्धान्युपलक्षितानि | सिद्ध (√सिध् + क्त, १.३)–उपलक्षित (√उप-लक्षय् + क्त, १.३) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| शो | का | नि | मि | त्ता | नि | त | दा | ब | हू | नि |
| धै | र्या | र्जि | ता | नि | प्र | व | रा | णि | लो | के |
| प्रा | दु | र्नि | मि | त्ता | नि | त | दा | ब | भू | वुः |
| पु | रा | पि | सि | द्धा | न्यु | प | ल | क्षि | ता | नि |