नैवास्ति नूनं मम दोषमत्र; वध्याहमस्याप्रियदर्शनस्य ।
भावं न चास्याहमनुप्रदातु;मलं द्विजो मन्त्रमिवाद्विजाय ॥
नैवास्ति नूनं मम दोषमत्र; वध्याहमस्याप्रियदर्शनस्य ।
भावं न चास्याहमनुप्रदातु;मलं द्विजो मन्त्रमिवाद्विजाय ॥
अन्वयः
अत्र मम here my, दोषः fault, नैवास्ति is not there, अहम् I am, अप्रियदर्शनस्य ugly, अस्य his, वध्या to be killed, अस्मि I am, अहम् I, अस्य his, भावम् (surrender) my heart, द्विजः brahmin, अद्विजाय to a nonbrahmin, मन्त्रमिव like the veda mantra, अनुप्रदातुम् to impart, न अलम् not proper.M N Dutt
Nor am I to blame for this. I am worthy of being killed by this demon of uncomely presence. As a Brāhmaṇa cannot impart instructions in Vedas to the people of other castes so I shall not confer my mind on Rāvana.Summary
"I will not be blamed if I commit suicide now.I stand condemned to death in the hands of this ugly Ravana. I cannot bestow my affection on him or surender to his desire like a brahmin would not like to impart Vedic knowledge to a nonbrahmin. (Better die of my own accord than be killed by a sinful ogre).पदच्छेदः
| नैवास्ति | न (अव्ययः)–एव (अव्ययः)–अस्ति (√अस् लट् प्र.पु. एक.) |
| नूनं | नूनम् (अव्ययः) |
| मम | मद् (६.१) |
| दोषम् | दोष (१.१) |
| अत्र | अत्र (अव्ययः) |
| वध्याहम् | वध्य (√वध् + कृत्, १.१)–मद् (१.१) |
| अस्याप्रियदर्शनस्य | इदम् (६.१)–अप्रिय–दर्शन (६.१) |
| भावं | भाव (२.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| चास्याहम् | च (अव्ययः)–इदम् (६.१)–मद् (१.१) |
| अनुप्रदातुम् | अनुप्रदातुम् (√अनुप्र-दा + तुमुन्) |
| अलं | अलम् (अव्ययः) |
| द्विजो | द्विज (१.१) |
| मन्त्रम् | मन्त्र (२.१) |
| इवाद्विजाय | इव (अव्ययः)–अ (अव्ययः)–द्विज (४.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नै | वा | स्ति | नू | नं | म | म | दो | ष | म | त्र |
| व | ध्या | ह | म | स्या | प्रि | य | द | र्श | न | स्य |
| भा | वं | न | चा | स्या | ह | म | नु | प्र | दा | तु |
| म | लं | द्वि | जो | म | न्त्र | मि | वा | द्वि | जा | य |