विराजमानं प्रतिपूर्णवस्तुना; सहेमदाम्ना शशिसूर्यवर्वसा ।
दिवाकराभं रथमास्थितस्ततः; स निर्जगामामरतुल्यविक्रमः ॥
विराजमानं प्रतिपूर्णवस्तुना; सहेमदाम्ना शशिसूर्यवर्वसा ।
दिवाकराभं रथमास्थितस्ततः; स निर्जगामामरतुल्यविक्रमः ॥
अन्वयः
ततः then, अमरतुल्यविक्रमः equal to gods in courage, सः he, सहेमदाम्ना with a golden garland, शशिसूर्यवर्चसा bright as Moon and Sun, प्रतिपूर्णवस्तुना equipped with all weapons, bows and shields etc, विराजमानम् glowing, दिवाकराभम् shining like the Sun, रथम् chariot, आस्थितः ascended, निर्जगाम went out.Summary
Prince Aksha, whose courage was equal to that of gods, shone like the Sun. He ascended the splendid chariot decked with golden garlands shining like Sun and Moon, equipped with all weapons, bows and shields etc, he went out.पदच्छेदः
| विराजमानं | विराजमान (√वि-राज् + शानच्, २.१) |
| प्रतिपूर्णवस्तुना | प्रतिपूर्ण (√प्रति-पृ + क्त)–वस्तु (३.१) |
| सहेमदाम्ना | सहेमन्–दामन् (३.१) |
| शशिसूर्यवर्चसा | शशिन्–सूर्य–वर्चस् (३.१) |
| दिवाकराभं | दिवाकर–आभ (२.१) |
| रथम् | रथ (२.१) |
| आस्थितस्ततः | आस्थित (√आ-स्था + क्त, १.१)–ततस् (अव्ययः) |
| स | तद् (१.१) |
| निर्जगामामरतुल्यविक्रमः | निर्जगाम (√निः-गम् लिट् प्र.पु. एक.)–अमर–तुल्य–विक्रम (१.१) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | रा | ज | मा | नं | प्र | ति | पू | र्ण | व | स्तु | ना |
| स | हे | म | दा | म्ना | श | शि | सू | र्य | व | र्व | सा |
| दि | वा | क | रा | भं | र | थ | मा | स्थि | त | स्त | तः |
| स | नि | र्ज | गा | मा | म | र | तु | ल्य | वि | क्र | मः |
| ज | त | ज | र | ||||||||