तं रक्षोऽधिपतिं क्रुद्धं तच्च कार्यमुपस्थितम् ।
विदित्वा चिन्तयामास कार्यं कार्यविधौ स्थितः ॥
तं रक्षोऽधिपतिं क्रुद्धं तच्च कार्यमुपस्थितम् ।
विदित्वा चिन्तयामास कार्यं कार्यविधौ स्थितः ॥
अन्वयः
कार्यविधौ the right course of action, स्थितः stood, तम् him, रक्षोधिपतिम् lord of demons, क्रुद्धम् angry, उपस्थितम् approached near, तत् that, कार्यं च mission also, विदित्वा having known, कार्यम् action, चिन्तयामास pondered.M N Dutt
And knowing that the lord of Rākşasas was wroth and that affair (The destruction of Hanuman) was at hand, Vibhisana, resolved to act according to justice, began to reflect as to what was to be done.Summary
Vibhishana who stood by the right course of action, having realised that the lord of demons was angry pondered over his duty.पदच्छेदः
| तं | तद् (२.१) |
| रक्षोऽधिपतिं | रक्षस्–अधिपति (२.१) |
| क्रुद्धं | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, २.१) |
| तच्च | तद् (२.१)–च (अव्ययः) |
| कार्यम् | कार्य (२.१) |
| उपस्थितम् | उपस्थित (√उप-स्था + क्त, २.१) |
| विदित्वा | विदित्वा (√विद् + क्त्वा) |
| चिन्तयामास | चिन्तयामास (√चिन्तय् प्र.पु. एक.) |
| कार्यं | कार्य (२.१) |
| कार्यविधौ | कार्य–विधि (७.१) |
| स्थितः | स्थित (√स्था + क्त, १.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तं | र | क्षो | ऽधि | प | तिं | क्रु | द्धं |
| त | च्च | का | र्य | मु | प | स्थि | तम् |
| वि | दि | त्वा | चि | न्त | या | मा | स |
| का | र्यं | का | र्य | वि | धौ | स्थि | तः |