अन्वयः
तदेकवासस्संवीता wearing only one cloth, तथैव च with that only, रजोध्वस्ता filled with dust, शोकसन्तापदीनाङ्गी very sorrowful and piteous, सीता Sita, भर्तृहिते wishing the welfare of her husband, रता remained.
Summary
"Wearing the same single cloth which she had worn before, filled with dust, Sita remained sorrowful and piteous wishing her husband's welfare.
पदच्छेदः
| तदेकवासःसंवीता | तद्–एक–वासस्–संवीत (√सम्-व्ये + क्त, १.१) |
| रजोध्वस्ता | रजस्–ध्वस्त (√ध्वंस् + क्त, १.१) |
| तथैव | तथा (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| च | च (अव्ययः) |
| शोकसंतापदीनाङ्गी | शोक–संताप–दीन–अङ्ग (१.१) |
| सीता | सीता (१.१) |
| भर्तृहिते | भर्तृ–हित (७.१) |
| रता | रत (√रम् + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | दे | क | वा | सः | सं | वी | ता |
| र | जो | ध्व | स्ता | त | थै | व | च |
| शो | क | सं | ता | प | दी | ना | ङ्गी |
| सी | ता | भ | र्तृ | हि | ते | र | ता |