पदच्छेदः
| एकवेणीधरा | एक–वेणी–धर (१.१) |
| दीना | दीन (१.१) |
| भर्तृचिन्तापरायणा | भर्तृ–चिन्ता–परायण (१.१) |
| अधःशय्या | अधःशय्य (१.१)–अधःशय्य (१.१) |
| विवर्णाङ्गी | विवर्ण–अङ्ग (१.१)–विवर्ण–अङ्ग (१.१) |
| पद्मिनीव | पद्मिनी (१.१)–इव (अव्ययः)–पद्मिनी (१.१)–इव (अव्ययः) |
| हिमागमे | हिम–आगम (७.१)–हिम–आगम (७.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | क | वे | णी | ध | रा | दी | ना |
| भ | र्तृ | चि | न्ता | प | रा | य | णा |
| अ | धः | श | य्या | वि | व | र्णा | ङ्गी |
| प | द्मि | नी | व | हि | मा | ग | मे |